आखिर क्यों लुटा

आखिर क्यों लुटा सितारों भरा आसमान क्यों लुटा मेरे सफर का सामान क्यों लुटा डूबते चाँद के आगोश में सोया था नन्हा सा मेरा अरमान क्यों लुटा गुज़ारिशों में गुज़री चंद मोहलतें भी वक्त के हाथों ये मेहमान क्यों लुटा…

कामयाबी_कदमों_में_आती_है..!!

आओ मैं बताता हूं कैसे कामयाबी कदमों में आती है..!! जिसको इस महफिल में कामयाबी की चाहत होती है..!! उसको अपने मुंह पर ही तानाएं सुनने पड़ते हैं..!! बात-बात पर लोगों की ठिठोली सुननी पड़ती है..!! लोगों के ठिठोली को…

युवा पीढ़ी संभल कर के, विवेकानंद हो जाये

कथानक, व्याकरण समझे तो, सुरभित छंद हो जाये हमारे देश मे फिर से सुखद मकरन्द हो जाये, मेरे ईश्वर मेरे दाता ये ‘कविता’ मांगती तुमसे, युवा पीढ़ी संभल कर के, विवेकानंद हो जाये । © कविता तिवारी

चरित्रहीन औरत

चरित्रहीन औरत मैं तलाश रहा हूँ एक चरित्रहीन औरत पर मैं हैरान हूँ… !!!! वो मुझे आज तक मिली नहीं.. ऐसा भी नहीं है कि मैं ने उसे सही से तलाशा नहीं..!! . मैं गया था वहाँ जिस अोर दर्शन,…

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